NIA की टीम ईस्टर बम धमाका मामले की जांच में सहयोग के लिए पहुंची श्रीलंका

राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) की दो सदस्यीय टीम ईस्टर बम धमाकों की जांच के सिलसिले में श्रीलंका में है. अधिकारियों ने बुधवार को यह जानकारी दी. श्रीलंका ने दावा किया था कि हमलों को अंजाम देने वाले आईएस के प्रति निष्ठा रखने वाले आतंकवादियों ने कश्मीर समेत भारत के कुछ हिस्सों का दौरा किया था.

एनआईए की टीम का नेतृत्व इंस्पेक्टर जनरल आलोक मित्तल कर रहे हैं जो दक्षिण भारत में आईएसआईएस से जुड़े मामलों की जांच कर चुके हैं. इनमें आतंकी मॉड्यूल द्वारा प्रमुख नेताओं की हत्या की साजिश का पर्दाफाश करना शामिल है.

मामले की जांच के दौरान एनआईए ने श्रीलंका को आगाह किया था कि आईएसआईएस के आतंकवादी वहां हमले करने की साजिश रच रहे हैं.

भारत नियमित रूप से श्रीलंका में भारतीय उच्चायोग और धार्मिक स्थलों को निशाना बनाकर किये जाने वाले संभावित आतंकी हमले के बारे में खुफिया जानकारी साझा कर रहा था. भारतीय प्रतिनिधिमंडल इस मामले में अपनी जांच की विस्तृत जानकारी श्रीलंका को देगा.

श्रीलंका में सुरक्षा स्थिति 99 फीसदी सामान्य हुई : सिरिसेना
इससे पहले सोमवार (27 मई) को श्रीलंका के राष्ट्रपति मैत्रीपाला सिरिसेना ने कहा था कि देश में आपातकाल संबंधी कानून एक महीने के अंदर हटा लिए जाएंगे क्योंकि ईस्टर के आत्मघाती बम हमले के बाद उत्पन्न सुरक्षा स्थिति 99 फीसद सामान्य हो गई है.

राष्ट्रपति के मीडिया संभाग ने एक बयान में कहा कि सिरिसेना ने ब्रिटेन, आस्ट्रेलिया, कनाडा, जापान, अमेरिका और यूरोपीय देशों द्वारा खुफिया एवं अन्य सहयोग प्रदान करने के लिए वहां के राजदूतों को धन्यवाद दिया.

बयान के अनुसार राष्ट्रपति ने जरूरत की इस घड़ी में सहयोग और सहायता प्रदान करने के लिए अंतरराष्ट्रीय बिरादरी के प्रति आभार प्रकट किया और उससे आर्थिक सहायता जारी रखने एवं पर्यटकों के लिए जारी प्रतिकूल यात्रा परामर्श वापस लेने की अपील की. राष्ट्रपति कार्यालय ने कहा कि सिरिसेना ने सोमवार को राजदूतों को समझाया कि वह गारंटी दे सकते हैं कि श्रीलंका में सुरक्षा स्थिति 99फीसद सामान्य हो चली है.

श्रीलंका में 21 अप्रैल को तीन गिरजाघरों और तीन लक्जरी होटलों पर आत्मघाती बम हमले में 258 लोग मारे गये थे और 500 अन्य घायल हुए थे. उसके बाद देश में आपातकाल लगा दिया गया था.

इन हमलों के बाद अमेरिका, ब्रिटेन और आस्ट्रेलिया समेत कई देशों ने अपने नागरिकों को अनावश्यक रूप से श्रीलंका नहीं जाने की सलाह दी थी. इससे श्रीलंका के पर्यटन उद्योग पर बहुत बुरा असर पड़ा.