मुस्लिम जेहादियों से निपटने के लिए चीन का अनोखा प्लान, जबरदस्ती कैंपो में रखकर दोबारा पढाई

चीन अपने देश में बढ़ते इस्लामिक कट्टरवाद से परेशान है ,जहां चीन ऐसे सभी जिहादियों पर कड़ी नज़र रख रहा है जो पाकिस्तान और अफगानिस्तान से वापिस उनके देश लौट रहे है वहीं चीन ने ऐसे सभी जिहादियों को पहचान कर उन्हें जबरदस्ती री-एजुकेशन कैम्प में रखा जा रहा है. इन जिहादियों को तब तक कैंप में रखा जाता है जब तक उनके व्यहार में बदलाव नहीं आ जाता.

चीन के शिनजियांग प्रान्त में मुस्लिम आबादी के बीच धार्मिक कट्टरता पिछले कुछ सालो में काफी बढ़ी है. कई ऐसे भी है जो आतंकी बन चुके है. चीन ने ऐसे सभी जिहादियों की पहचान की है जो उनके देश के लिए भविष्य में खतरा बन रहे है और इसलिए री-एजुकेशन कैंप के जरिये उनमे बदलाव लाने की कोशिश की जा रही है, हालंकि चीन के इस कदम पर कई सवाल भी उठ रहे है और दुनिया के कुछ देश इसे धार्मिक और अभिव्यक्ति की आज़ादी के लिए खतरनाक मान रहे है .

चीन के आन्तरिक मामलों पर नज़र रखने वाले सुरक्षा से जुड़े एक अधिकारी ने बताया की चीन इसमे अपने मीडिया का भी काफी सहारा ले रहा है. चीन की मीडिया इन री-एजुकेशन कैंप के सपोर्ट में अपने देश में प्रोपगंडा अभियान चला रही है. जिससे लोगों को ये समझाया जा सके की री-एजुकेशन कैंप उनके देश के लिए क्यों जरुरी है. चीन के इन री-एजुकेशन कैंप का पाक अधिकृत कश्मीर में काफी विरोध हो रहा है. विरोध का सबसे ज्यादा असर गिलगित बालटिस्तान में देखने को मिल रहा है जहां के लोगों का आरोप है कि चीन ने उन लडकियों को अपने देश में नज़रबंद कर दिया है जिन्होंने गिलगित बालटिस्तान के लोगों से शादी की है .

चीनी ने री-एजुकेशन कैंप का पूरी दुनिया में हो रहे विरोध के चलते अपने सभी दूतावासों से कहा है कि वो चीन के पक्ष में माहौल बनाने के लिए अभियान छेड़े. पाकिस्तान में स्थित चीनी दूतावास इन दिनों गिलगिट बाल्टिस्तान  में काफी सक्रिय है जिससे किसी भी तरह के विरोध को रोका जा सके. पाक अधिकृत कश्मीर से चीन पाकिस्तान इकॉनोमिक कॉरिडोर गुजरती है ऐसे में लोगों के लगातार हो रहे विरोध से चीन और पाकिस्तान का काफी नुकसान हो सकता है .