आतंकी फंडिंग मामले में हाफिज सईद के खिलाफ पाक की अदालत ने टाला फैसला, 11 को होगी सुनवाई

आतंकी फंडिंग के मामले में जमात-उद-दावा प्रमुख और मुंबई हमले के मास्टरमाइंड हाफिज सईद के खिलाफ दो मामलों में पाकिस्तान की आतंकवाद रोधी अदालत ने शनिवार को फैसला टाल दिया है। अदालत ने हाफिज सईद और उसके तीन सहयोगियों को आतंकी फंडिंग में शामिल पाया है।
अदालत ने सईद के अनुरोध पर ऐसा किया और मामले की सुनवाई मंगलवार तक के लिए स्थगित कर दी। आतंकवाद रोधी अदालत (एटीसी) लाहौर के न्यायाधीश अरशद हुसैन भुट्टा ने आतंकवाद के लिए धन मुहैया कराने के दो मामलों में जमात उद दावा के प्रमुख के खिलाफ फैसले को पिछले हफ्ते शनिवार के लिए सुरक्षित रख लिया था।

शनिवार को सुनवाई के बाद अदालत के एक अधिकारी नेबताया कि एटीसी न्यायाधीश ने हाफिज सईद के आवेदन पर गौर किया जिसमें उसने अपने खिलाफ आतंकवाद के लिए धन मुहैया कराने के सभी मामलों को मिलाने और मुकदमा पूरा होने के बाद फैसला सुनाने की अपील की थी। अधिकारी ने बताया कि उप अभियोजक ने सईद की याचिका का विरोध किया और तर्क दिया कि उसके खिलाफ दो मामलों में मुकदमा पहले ही पूरा हो चुका है और अदालत कानून के तहत फैसला सुना सकती है।

हालांकि अदालत ने सईद की याचिका पर जिरह के लिए अभियोजन और बचाव पक्ष के वकीलों को नोटिस जारी कर सुनवाई 11 फरवरी तक के लिए टाल दी। जमात-उद-दावा प्रमुख हाफिज सईद और उसके संगठन पर लंबे समय से आतंकवादियों को मदद पहुंचाने के आरोप लगते रहे हैं और पाकिस्तान सरकार ने इसे गंभीरता से लेते हुए सईद और उसके 13 सहयोगियों को पिछले साल जुलाई में ऐसे दो दर्जन मामलों में गिरफ्तार किया था।

हाफिज सईद के सहयोगियों हाफिज अब्दुल सलाम बिन मोहम्मद, मोहम्मद अशरफ और प्रोफेसर जफर इकबाल को भी आतंकवाद विरोधी कानून 1997 के तहत गिरफ्तार किया है। इस मामले में सरकार की तरफ से मुफ्ती अब्दुर रऊफ वाटो ने अपना पक्ष रखा और गवाहियां पेश कीं। उनके मुताबिक इस दौरान 23 गवाहों के बयान दर्ज किए गए। वाटो के मुताबिक हाफिज सईद आतंकवादियों के लिए चैरिटी के जरिये गैरकानूनी तरीके से फंड जमा करता रहा है।

जुलाई में सईद के साथ उसके जिन 13 सहयोगियों को गिरफ्तार किया गया था उनमें एक प्रमुख नाम नईब आमिर अब्दुल रहमान मक्की का भी हैं। सईद को 17 जुलाई को तब पकड़ा गया जब वह गुजरांवाला से लाहौर जा रहा था। उसके खिलाफ पंजाब के पांच शहरों में केस दर्ज किए गए और पाया गया कि वह अपने एनजीओ एल अनफाल ट्रस्ट, दावातुल ट्रस्ट, मउज बिन जबाल ट्रस्ट के जरिये फंड जमा करने का काम करता रहा है।
पाकिस्तान सरकार ने इन संगठनों पर पिछले साल अप्रैल से ही प्रतिबंध लगा रखा है। इनपर आरोप है कि इनके जरिए जमात उद दावा ने बड़ी मात्रा में संपत्ति जमा कर रखी है जिसका इस्तेमाल वह आतंकवादियों को मदद करने में करता रहा है। पाकिस्तान के आतंकवाद विरोधी सेल ने इनके खिलाफ दस्तावेजी सबूत इकट्ठे किए और अदालत में पेश किया। सरकार ने इन संपत्तियों को सील कर रखा है।

माना जा रहा है कि पाकिस्तान ने आतंकवादियों को फंडिंग देने वाले संगठनों पर रोक लगाने में नाकाम रहने के आरोपों के मद्देनजर ये कार्रवाई तेज कर दी है। हाल ही में फाइनेंशियल एक्शन टास्कफोर्स (एफएटीएफ) ने पाकिस्तान को चेतावनी दी थी कि अगर पाकिस्तान आतंकी फंडिंग रोकने में कारगर नहीं हुआ, तो उसे ग्रे लिस्ट से ब्लैक लिस्ट में डाल दिया जाएगा।