नेता दिल्ली पर दबाव के लिए युवाओं की चाहते हैं मौत: राज्यपाल मलिक

राज्यपाल सत्यपाल मलिक ने फिर एक नए विवाद को जन्म दिया है। उन्होंने आरोप लगाया कि जम्मू-कश्मीर के राजनेता चाहते हैं कि युवाओं की मौत हो और दिल्ली को ब्लैकमेल कर दबाव बनाया जा सके।

किसान मेले का शुभारंभ करने के बाद कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी संविधान के दायरे में जम्मू-कश्मीर के लोगों की हर मांग को पूरा करने के लिए तैयार हैं क्योंकि उनके मन में कश्मीर के लोगों के प्रति प्यार व सम्मान है। कहा कि इस गलत धारणा को उन्होंने निकाय व पंचायत चुनाव के दौरान साफ कर दिया था और साफ संदेश दिया था कि नई दिल्ली किसी भी तरह के दबाव में आने वाला नहीं है। वह ब्लैकमेल के किसी भी दबाव में आने वाला नहीं है। यदि गोलियां चलेंगी तो इधर से उन्हें बुके नहीं दिया जाएगा। कश्मीर में आतंकियों को मारने से कोई समाधान नहीं निकलेगा। उन्हें हिंसा का रास्ता छोड़कर मुख्यधारा में शामिल होना चाहिए। वह यहां इन बच्चों का जान लेने के लिए नहीं हैं। यदि वह लौट आए तो हम उनके लिए कुछ करने को तैयार हैं। इस संबंध में रास्ता निकालने की कोशिश की जा रही है।

उमर-महबूबा पर साधा निशाना
उन्होंने पंचायत और निकाय चुनाव के संबंध में पीडीपी की महबूबा मुफ्ती व नेकां के उमर अब्दुल्ला पर निशाना साधा। कहा कि राजनीतिक पार्टियों के दोहरे मापदंड हैं। वह इससे उनसे गुस्से में हैं। उन्होंने प्रोटोकॉल तोड़कर महबूबा मुफ्ती और उमर अब्दुल्ला से मुलाकात की। इन नेताओं से पंचायत चुनाव का बहिष्कार ना करने का अनुरोध किया। ताकि लोग सशक्त हों। लेकिन इसके बावजूद यह पार्टियां इस चुनाव में शामिल नहीं हुईं। महबूबा पर तंज कसते हुए कहा कि आतंकी के मारे जाने की पुष्टि किए बगैर ही एक पार्टी के नेता घर पर संवेदना जताने पहुंच गए। यह कैसे चलेगा।

पत्थरबाजी के लिए युवाओं को भड़काया जाता है
मलिक ने अलगाववादियों तथा कश्मीर की मुख्यधारा की पार्टियों पर निशाना साधते हुए कहा कि जब आधी रात को भारी बर्फबारी के बीच सेना आतंकियों से मुकाबला कर रही होती है तो मस्जिदों से लोगों को जुटकर पत्थरबाजी करने के लिए उकसाया जाता है। आतंकियों के शव छीनने तथा सेना के वाहन को घेरकर हथियार छीनने के लिए भड़काया जाता है। इस दौरान यदि कोई मारा जाता है तो घाटी में बंद का आह्वान किया जाता है। लोगों को भड़काने पर सवाल करते हुए कहा कि पूरे विश्व में यह कहां होता है कि आप सेना को निशाना बनाओ और वह छोड़ देंगे। इसे सख्ती के साथ कुचला जाएगा। उन्होंने लोगों से सेना के प्रति विचार बदलने तथा विचारधारा बदलने को कहा। यदि कुछ हो सकता है तो वह बातचीत से ही संभव है। आगे आकर देश के संविधान के दायरे में बात करें। आपका अलग झंडा और अलग विधान है। इसके बाद भी मामले को तूल दिया जा रहा है।

अलगाववादियों को सलाह
राज्यपाल ने अलगाववादियों को सलाह देते हुए कहा कि भारतीय सेना विश्व की चौथी सबसे बड़ी सेना है। इससे लड़ने के बाद जनरल परवेज मुशर्रफ ने स्वयं हुर्रियत के लोगों को संदेश दिया था कि संवाधिन के दायरे में वे भारत के साथ बातचीत के लिए आगे आएं।

आतंकवाद से समझौता नहीं
राज्यपाल ने स्पष्ट कहा कि आतंकवाद से किसी प्रकार का समझौता नहीं होगा। 300 आतंकी भारत को तोड़ नहीं सकते। वह कुछ भी नहीं हैं। भारतीय सेना और सुरक्षाबल एक से दो दिन के अंतराल पर दो से तीन आतंकियों को मारने में सक्षम है। यह अच्छी बात है कि लोगों ने समझ लिया है कि बंदूक से उन्हें कुछ नहीं मिलने वाला है।

राज्यपाल राजनीति करना बंद करें : उमर
उमर अब्दुल्ला ने ट्वीट में लिखा कि राज्यपाल जी आप अपमानजनक और बनावटी बयानबाजी करना बंद करें। इस पद पर नियुक्त व्यक्ति को ऐसी चीजें शोभा नहीं देतीं। यह केवल आपके कार्यालय का सम्मान है जहां आप नियुक्त हैं, जिसने मुझे वह सब बातें दोहराने से रोका हुआ है। कृपया राजनीति करना बंद करें और अपने काम पर ध्यान केंद्रित करें।

विस भंग करना व्यक्तिगत सशक्तीकरण : पीडीपी
पीडीपी के ओर से ट्विटर हैंडल पर लिखा गया है कि लोकतांत्रिक सरकार को कार्य करने नहीं देना और लोगों और राजनीतिक दलों की भागीदारी के बिना लोकतंत्र के सशक्तीकरण की बात करना। पंचायत की बात करते हैं। अनैतिक रूप से विधानसभा भंग करना व्यक्तिगत सशक्तीकरण है, बहिष्कार नहीं।